Sunday, November 27, 2005

मामी के मम्मे

जब मैं छोटा था तब से मुझे अपनी मामी बहुत सेक्सी लगती थी. बड़े बड़े मम्मे वो भी कसे हुए ब्लाउज में. ऊपर से उसके दोनो बेटे और पति भी हरामी थे. तीनो के तीनो उसके मम्मों को ताकते रहते थे या फिर दबाते या सहलाते रहते थे. और मामी भी पूरी ऐश लेती थी. एक बार कार में कहीं जा रहे थे तो मैं मामी के बगल में बैठा था और कार पूरी खचाखच भरी थी. तो मैं लद गया मामी के ऊपर. कुछ 13-14 साल का रहा हूंगा। उस दिन उसने हल्का नीला ब्लाउज पहना था. अचरज की बात थी कि जब मेरी पीठ मामी के मम्मे को दबा रही थी तो मुझे लगा कि यार इतने कड़क मम्मे कैसे हैं, जैसे कि एकदम पत्थर के बने हों. ये सोच सोच के मेरे लंड भी एकदम कड़क हो गया था. कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई न पीछे देखने की न हिलने की. लग रहा था कि कहीं पता न चल जाए कि मैं मजे ले रहा हूं. लेकिन मामी ने कुछ नहीं बोला. मुझे लगता है कि वो भी मजे ले रही थी. लेकिन उससे क्या. मुझे ये भी याद है कि पहले में उसपर लदा था तो मम्मे पर नहीं लद पाया था तो मामी ने खुद ही अपनी body को adjust कर के मुझे ठीक मम्मे के सामने लाया. मजा आ गया था. मन कर रहा था उसी time पकड़ के चोद दूं साली को.

देसी बाबा

देसी बाबा क्या बोलते हैं - मजे करो मजे.

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